Dr Shafali Garg

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ज्योतिष” भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है, और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है।

90% लोग शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय करते हैं ये गलतियाँ! सही तरीका जानें

शिवलिंग पर जल चढ़ाना कोई खेल नहीं है।
यह श्रद्धा, पवित्रता और समर्पण का अभ्यास है। हर दिन कुछ मिनट अपने मन को शांत करके भोलेनाथ को जल अर्पित करें। ध्यान रखें—जल के साथ दिल की भावना जुड़ना बहुत जरूरी है।

मतलब सिर्फ यह सोचना नहीं कि “मैं पूजा कर रहा हूँ”, बल्कि ऐसा महसूस करें जैसे भोलेनाथ आपके सामने खड़े हैं और आप उन्हें स्नान करा रहे हैं। जैसे एक बच्चा अपनी माँ की सेवा करता है, वैसे ही आप अपने महादेव की सेवा कर रहे हैं।

पूजा में पूरी तरह डूब जाएँ, फिर देखिए—भोलेनाथ आपकी मनोकामनाएँ पूरी करने के लिए रास्ते बनाना शुरू कर देंगे। यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति की शक्ति है।


🔱 शिवलिंग पर जल अर्पित करने का संपूर्ण सही क्रम

✅ Step 1: शुद्धि और तैयारी (5 मिनट)

सबसे पहले स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें। यदि संभव हो तो सफेद या भगवा रंग के कपड़े पहनें।
फिर हाथ-पैर धोकर आचमन करें, यानी थोड़ा जल हाथ में लेकर तीन बार पी लें।

मंत्र बोलें:

  • ॐ केशवाय नमः
  • ॐ नारायणाय नमः

यह शरीर और मन की शुद्धि के लिए है।

अब शिवलिंग के सामने बैठें, एक गहरी साँस लें और मन को शांत करें। सोचें कि आप भोलेनाथ की उपस्थिति में हैं।


✅ Step 2: संकल्प लेना (2 मिनट)

अब अपने दाहिने हाथ में थोड़ा जल लें और संकल्प बोलें—

“ॐ श्री महागणाधिपतये नमः।
अथ मम सर्वकार्यसिद्ध्यर्थं श्रीमहादेवस्य प्रीत्यर्थं जलाभिषेकं करिष्ये।”

अर्थ: आज अपने सभी कार्यों की सिद्धि और महादेव को प्रसन्न करने के लिए मैं जल अभिषेक करूँगा।
यह संकल्प आपकी पूजा को दिशा देता है।

किसी भी पूजा की शुरुआत गणेश जी से होती है। यदि शिवलिंग के पास गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर हो, तो उन्हें प्रणाम करें।


✅ Step 3: महादेव का ध्यान (2 मिनट)

अब शिवलिंग को देखें, आँखें बंद करें और मन में महादेव का ध्यान करें।

कल्पना करें कि शिवलिंग में साक्षात भोलेनाथ विराजमान हैं—

  • जटाओं में गंगा
  • मस्तक पर चंद्रमा
  • गले में नीलकंठ का नीला चिन्ह
  • हाथों में त्रिशूल और डमरू

यह ध्यान आपकी भक्ति को गहरा करता है।


✅ Step 4: जल अभिषेक का सही क्रम (10–15 मिनट)

यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है।

  • एक लोटे या कलश में शुद्ध जल भरें।
  • यदि गंगाजल हो तो सर्वोत्तम, नहीं तो साफ जल भी चलेगा।
  • चाहें तो जल में थोड़ा दूध मिला सकते हैं (वैकल्पिक, पर शुभ माना जाता है)।

अब ध्यान रखें:
जल धीरे-धीरे पतली धार में चढ़ाएँ। एकदम से पूरा लोटा उँडेलना उचित नहीं है।

शिवलिंग के शीर्ष से जल गिराएँ और उसे चारों ओर बहने दें—यह प्रदक्षिणा का प्रतीक है।

मंत्र जप करें:

  • ॐ नमः शिवाय
    या
  • ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्… (महामृत्युंजय मंत्र)

यदि मंत्र पूरा न आए तो केवल “ॐ नमः शिवाय” जपते रहें।

कम से कम 108 बार जप करें। माला से गिन सकते हैं या मन में गिनती रखें।

अंत में शिवलिंग को साफ जल से एक बार और धो दें—यह अंतिम स्नान है।


✅ Step 5: बिल्व पत्र अर्पण (3 मिनट)

अब बिल्व पत्र (बेल पत्र) चढ़ाएँ। तीन पत्तों का एक समूह शिवलिंग पर रखें और बोलें—

ॐ नमः शिवाय

यदि बिल्व पत्र न हो तो धतूरा, सफेद आक का फूल या कोई सफेद पुष्प चढ़ा सकते हैं।
⚠️ ध्यान रखें: केतकी का फूल न चढ़ाएँ, यह वर्जित है।


✅ Step 6: धूप, दीप और नैवेद्य (3 मिनट)

  • धूप या अगरबत्ती जलाएँ और शिवलिंग के सामने दाएँ ओर से तीन बार घुमाएँ।
  • फिर घी का दीपक जलाकर तीन बार आरती करें।
  • अब फल, मिठाई या जो भी बनाया हो, नैवेद्य (भोग) लगाएँ।
  • “ॐ नमः शिवाय” बोलते रहें।

✅ Step 7: आरती और प्रार्थना (5 मिनट)

अब शिव आरती करें—

जय शिव ओंकारा…

घंटी हो तो बजाएँ या ताली बजाएँ।

आरती के बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें—

हे भोलेनाथ! आपने मुझे आपकी पूजा का अवसर दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद।
मेरी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करें, मुझे और मेरे परिवार को स्वस्थ और सुखी रखें,
और मुझे सदैव आपकी भक्ति में लगाए रखें।
ॐ नमः शिवाय।


✅ Step 8: प्रदक्षिणा और प्रणाम (2 मिनट)

अब खड़े होकर शिवलिंग की 3 या 7 बार प्रदक्षिणा करें (दाएँ से घूमें)।
हर प्रदक्षिणा में ॐ नमः शिवाय बोलें।

अंत में साष्टांग प्रणाम करें और मन में कहें—
“महादेव, मैं आपके चरणों में समर्पित हूँ।”


✅ Step 9: प्रसाद ग्रहण और मौन (3 मिनट)

  • प्रसाद ग्रहण करें।
  • थोड़ा स्वयं लें और बाकी परिवार में बाँट दें।
  • इसके बाद कुछ देर मौन रहकर भोलेनाथ का ध्यान करें।

⚠️ पूजा के तुरंत बाद शोर या बातचीत करने से पूजा की ऊर्जा भंग होती है।


🔔 कुछ जरूरी बातें याद रखें

महिलाएँ मासिक धर्म के दौरान दूर से प्रणाम कर सकती हैं और मन से पूजा कर सकती हैं।

रोज न कर सकें तो सोमवार को अवश्य करें।

नियमितता (Consistency) बनाए रखें।

शिवलिंग हमेशा साफ रखें।

अभिषेक का जल फेंकें नहीं—किसी पौधे में डालें।

पूजा के समय मोबाइल दूर रखें।

तांबे के लोटे से जल चढ़ाना श्रेष्ठ माना जाता है।

घर में शिवलिंग न हो तो मंदिर में भी यही विधि अपनाएँ।

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