आज हम सूर्य ग्रहण से जुड़ी कई भ्रांतियों को दूर करेंगे—क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, कौन-से उपाय करने चाहिए और यह ग्रहण कहाँ-कहाँ दिखाई देगा।
🔭 वर्ष में कितने ग्रहण लगते हैं?
सामान्यतः हर वर्ष कम से कम 3 से 4 ग्रहण लगते हैं, जिनमें:
- 2 सूर्य ग्रहण
- 2 चंद्र ग्रहण
ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण हमेशा राहु या केतु के साथ लगता है। लगभग छह महीने बाद दूसरा ग्रहण विपरीत नोड (राहु/केतु) के साथ होता है।
🌞 इस बार का सूर्य ग्रहण: मुख्य जानकारी
- तिथि: 17 फरवरी
- राशि: कुंभ
- प्रकार: एंगुलर (Annular) सूर्य ग्रहण
कुंडली के अनुसार:
- सूर्य लगभग 4°32′ पर होंगे
- राहु लगभग 15° पर होगा
- दोनों के बीच लगभग 10° का अंतर है
इसी कारण यह टोटल सोलर एक्लिप्स नहीं बल्कि एंगुलर (Annular) सूर्य ग्रहण है।
एंगुलर सूर्य ग्रहण क्या होता है?
इसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता, बल्कि बीच का भाग ढकता है और किनारों पर सूर्य का प्रकाश दिखाई देता रहता है। इसलिए यह अंगूठी (Ring) जैसा दिखाई देता है।
📍 भारत में दिखाई देगा या नहीं?
- भारत में यह सूर्य ग्रहण दृष्ट नहीं होगा।
- भारत में इसकी समयावधि लगभग दोपहर 3:30 बजे से शाम 7:30 बजे के बीच रहेगी, लेकिन दृश्य नहीं होगा।
🌍 ग्रहण कहाँ दिखाई देगा?
यह मुख्यतः दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) में दिखाई देगा, जैसे:
- दक्षिण अमेरिका का दक्षिणी भाग
- चिली
- अर्जेंटीना
- फॉकलैंड द्वीप
- अंटार्कटिका
- अफ्रीका का दक्षिणी भाग
- दक्षिण अफ्रीका
- जिम्बाब्वे
- मेडागास्कर
- मॉरीशस (आंशिक)
❗ क्या भारत में प्रभाव होगा?
कुछ लोग कहते हैं—“जब भारत में दिख ही नहीं रहा तो असर क्या होगा?”
जबकि कुछ लोग अनावश्यक डर फैलाते हैं।
संतुलित समझ यह है:
- खगोलीय घटना वैश्विक होती है
- ज्योतिषीय रूप से ग्रहों की स्थिति पूरे चार्ट को प्रभावित करती है
- कुंभ राशि आपकी कुंडली का कोई न कोई भाव अवश्य होगी
इसलिए प्रभाव सूक्ष्म स्तर पर माना जाता है, लेकिन घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।
⏳ सूतक लगेगा या नहीं?
- चंद्र ग्रहण का सूतक: 3 प्रहर (लगभग 9 घंटे)
- सूर्य ग्रहण का सूतक: 4 प्रहर (लगभग 12 घंटे)
✅ भारत में ग्रहण दृष्ट नहीं है, इसलिए यहाँ सूतक मान्य नहीं होगा।
धार्मिक कार्य सामान्य रूप से चलते रहेंगे।
जहाँ ग्रहण दिखाई देगा, वहाँ 12 घंटे का सूतक माना जाएगा।
🪐 पाँच ग्रहों का योग: क्या यह खतरनाक है?
इस ग्रहण के समय कुंभ राशि में पाँच ग्रहों की उपस्थिति की चर्चा हो रही है। लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से:
- सूर्य ग्रहण में सूर्य + चंद्रमा + राहु/केतु तो होते ही हैं
- बुध (Mercury) अक्सर सूर्य के पास रहता है
- शुक्र (Venus) भी कई बार निकट होता है
इसलिए सूर्य ग्रहण के समय कई ग्रहों का साथ होना असामान्य नहीं है।
👉 निष्कर्ष: केवल पाँच ग्रह साथ होने से डरने की आवश्यकता नहीं है।
🔥 मंगल का विशेष बिंदु
ग्रहण के बाद मंगल उसी डिग्री को क्रॉस करेगा जहाँ ग्रहण लगा है, और ग्रहण धनिष्ठा नक्षत्र (मंगल का नक्षत्र) में है।
इस कारण ज्योतिषीय विद्यार्थियों के लिए यह एक ध्यान देने योग्य संयोजन है।
हालाँकि इसका प्रभाव अधिकतर mundane (वैश्विक/सामूहिक) स्तर पर माना जाता है, व्यक्तिगत स्तर पर नहीं।
⚠️ ग्रहण के दौरान क्या सावधानी रखें?
ग्रहण को परंपरागत रूप से शुभ नहीं माना जाता। इस समय:
- नए कार्य शुरू करने से बचें
- विवाद, आरोप-प्रत्यारोप से दूर रहें
- मान-सम्मान और प्रतिष्ठा का ध्यान रखें
- मानसिक संतुलन बनाए रखें
यदि आप आध्यात्मिक प्रवृत्ति के हैं, तो:
- मंत्र जप
- ध्यान
- प्रार्थना
करना अनुकूल माना जाता है।
🧠 महत्वपूर्ण ज्योतिषीय समझ
ज्योतिष में बड़ी घटनाएँ कभी अकेले नहीं होतीं—वे कई कारकों के संयोजन से बनती हैं।
उदाहरण के लिए, यदि:
- पहले से करियर में समस्याएँ चल रही हों
- दशा-भुक्ति सहयोग न कर रही हो
- और उसी समय ग्रहण का प्रभाव आए
तब व्यक्ति को अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।
✅ अंतिम निष्कर्ष
- यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं
- पाँच ग्रहों का योग असामान्य नहीं है
- सामान्य जीवनचर्या जारी रख सकते हैं
- केवल अनावश्यक डर और अंधविश्वास से बचें
- चाहें तो इस समय को ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए उपयोग करें